Holi Ke Totke

holi ke totke
holi ke totke

Holi Ke Totke

किसी विशेष समय पर किये गए उपाय शीघ्र व् अवश्य ही फल देते हैं ! यह विशेष समय होली, दिवाली, दशहरा व् ग्रहण काल का माना गया है ! ऐसा माना जाता है कि इन अवसरों पर देवी देवताओं की कुछ ऐसी विशेष कृपा होती है कि इस समय किये गए उपाय का लाभ शीघ्र मिलता है और उसका फल लम्बे समय तक स्थाई रूप से बना रहता है! उपरोक्त अवसरों के आलावा अन्य समय पर भी यह उपाय कर सकते हैं और उनका भी लाभ होता है परन्तु इसमें कुछ समय अधिक लग सकता है ! For this Holi Ke Totke is very important to do your work on time and fulfillment of your wish.

अपनी परेशानियों  को  दूर करें , अपनी सभी समस्याओं के समाधान के लिए  Astrologer Pankaj Kumar से सम्पर्क करें !

9910727979

 

Holi Ke Totke आर्थिक लाभ के लिए :-

(1) यदि आप किसी भी प्रकार से आर्थिक समस्या में हैं तो होली की रात में चंद्रमा के उदय होने के बाद अपने घर की छत पर आ जाएँ ! भगवान चंद्रमा को शुद्ध घी के दीपक के साथ धूपबती व् अगरबती अर्पित कर कोई भी सफ़ेद मिठाई (प्रशाद) व् साबूदाने की खीर अर्पित करें! भगवान चन्द्रदेव से अपने घर मे स्थाई शांति के साथ स्थाई आर्थिक समृधि की प्रार्थना करें! बाद में भगवान चन्द्रदेव को लगा भोग प्रशाद के रूप में बच्चों में बाँट दें! कुछ ही दिनों में आप अनुभव करेंगे कि आपकी आर्थिक समस्याएँ कम होकर लाभ की स्थिति बन रही है! यदि अधिक लाभ चाहते हैं तो यह उपाय आप प्रत्येक पूर्णिमा को भी कर सकते हैं !

(2) यदि आपने यह उपाय होली की रात्रि में किया तो इसके प्रभाव से आप कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे ! होली की रात्रि में सबसे पहले अपने घर में या कोई व्यवसायिक जगह हो तो वहाँ पर भी सारी लाइट जला दें व् शाम के समय ( सूर्य डूबने से पहले ) दिया-बती करें! लक्ष्मी जी का कोई भी मन्त्र 11 बार पढ़ें! इसके बाद घर या व्यवसाय की कोई भी कील लाकर जिस स्थान पर होली जलनी है, वहाँ की मिटटी में दबा दें ! अगले दिन उस कील को निकालकर अपने घर या व्यवसाय के मुख्य द्वार के बाहर की मिटटी में दबा दें ! इस उपाय के प्रभाव से आपके घर या व्यवसाय में किसी नकरात्मक शक्ति का प्रवेश नहीं होगा व् आप आर्थिक संकट में नहीं आयेंगे!

विशेष :-  हो सकता है कि जिस जगह पर होलिका दहन होगा उस जगह पर कील को दबाना और अगले दिन उसे ढूंढकर ले आना आपको मुश्किल लग रहा हो तो इसके लिए आप इस उपाय को इस तरह भी कर सकता हैं ! होलिका जलने के बाद उसकी थोड़ी सी गर्म राख घर में ले आयें ! घर के मुख्य द्वार के अंदर की तरफ जमीन पर कील रखकर उसके ऊपर होली की रख रख दें और ऊपर से किसी चीज से ढक दें ! अगले दिन कील को उपर दिए उपाय के अनुसार प्रयोग करें और राख को जल में प्रवाहित कर दें ! ऐसा करने से भी आपको सम्पूर्ण लाभ होगा !

Holi Ke Totke किसी भी प्रकार की बाहरी और उपरी बाधा से मुक्ति व् बचाव:-

कई बार हम देखते हैं कि किसी भी निवास स्थान या व्यवसाय पर अचानक से कुछ विचित्र घटनाये होने लगती हैं ! उस स्थान पर प्रवेश करते ही मन में घुटन होने लगती है! अप्रत्याशित रूप से हानि होने लगती है! दम्पत्य संबंधों में कलेश होने लगता है ! यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा होता है तो समझ जाएँ कि आप किसी प्रकार की बाहरी या उपरी बाधा से परेशान हैं ! जब तक आप उस बाधा से मुक्ति नहीं पा लेते तब तक आप समस्याग्रस्त ही रहेंगे ! उस बाधा से आपको आर्थिक हानि, क्लेश तथा बीमारी मिलेगी ! अब जो उपाय बताने जा रहा हूँ वह किसी भी प्रकार की बाहरी बाधा व् उपरी बाधा से मुक्ति दिलाने में अत्यंत प्रभावी है !

 

होली दहन की रात में गाय के गोबर से एक दीपक बनायें! यदि काली गाय का गोबर मिल जाये तो ये बहुत ही अच्छा है ! उस दीपक में सरसों का तेल डालकर थोडा सा गुड व् काले तिल डाल दें ! फिर दीपक को घर या व्यवसाय स्थान के मुख्य द्वार के बिलकुल मध्य स्थान पर रख दें ! द्वार की चौखट के बाहर 800 ग्राम काली उड़द की दाल डाल दें या बिखेर दें ! इसके पश्चात दीपक को जला दें और द्वार बंद कर दें ! अगले दिन ठंडा दीपक घर के बाहर ही रखें और झाड़ू की मदद से सारी दाल को समेट लें !

 

फिर ठंडा दीपक और दाल को किसी पीपल वृक्ष की जड़ में रख दें अथवा बहते जल में प्रवाहित करें और वापिस आ जाएँ ! हाथ पैर धोकर ही घर या व्यवसाय स्थल में प्रवेश करें ! इसके पश्चात् होली के बाद आनेवाले शनिवार को ये कार्य दुबारा करें और लगातार तीन शनिवार तक करें! यदि आपको लगे की बाधा बड़ी है तो अगले शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से शुरू करके ये क्रिया तीन शनिवार तक लगातार करें ! कार्य सिद्ध होने पर किसी भी शनिवार को पीपल में मीठा जल चढ़ाने के साथ धूप दीप अर्पित करें ! यह सिद्ध उपाय है ! इसको करने से आपको अवश्य ही बाहरी व् उपरी बाधा से मुक्ति मिलेगी !

Holi Ke Totke रोगमुक्ति के लिए

यदि आपके परिवार में अथवा परिचित में कोई व्यक्ति बीमार है या लम्बे समय से अस्वथ है तो उसके लिए यह उपाय अत्यन्य प्रभावकारी है !

होलिका दहन की रात्रि में एक सफ़ेद वस्त्र में 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र , 21 नागकेसर के जोड़े (42 पीस) , व् 8 धनकारक कौड़ियां बांध लें ! कपडे पर हरसिंगार तथा चन्दन का इत्र लगाकर बीमार व्यक्ति पर से सिर से पैर की तरफ बायीं तरफ से शुरू करके 7 बार उसार कर किसी शिव मंदिर में अर्पित कर दें ! रोगी तुरंत स्वस्थ होने लगेगा ! यदि बीमारी गंभीर है तो यही कार्य आप शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से शुरू करके लगातार 7 सोमवार करें! ये एक चमत्कारी उपाय है, जिसे करने से कई जातको को लाभ हो चुका है!

 

 

Holi Ke Totke रोगमुक्ति के साथ किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए:-

यह उपाय रोग मुक्ति के साथ किसी विशेष कार्य सिद्धि के लिए भी किया जा सकता है ! यदि आप अपना कोई विशेष कार्य सिद्ध करना चाहते हैं या कोई गंभीर रूप से बीमार है तो होलिका दहन की रात को एक सवा मीटर काला कपडा लेकर उसमे 7 काली हल्दी की गांठे व् नारियल के खोपरे में बूरा डालकर पोटली बना लें ! अब उस पोटली को पीपल वृक्ष के नीचे गड्ढा कर के दबा दें साथ में 8 गोमती चक्र भी दबा दें ! पीपल वृक्ष पर आटे से निर्मित सरसों के तेल का दीपक जलाएं व् धूप अगरबती अर्पित करें !

अब हाथ जोड़कर यदि अस्वथ हैं तो रोग मुक्ति के लिए निवेदन करें और यदि कोई विशेष कार्य सिद्ध करवाना चाहते हैं तो उसके लिए निवेदन करें ! इसके पश्चात आनेवाले शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को ऊपर दिए तरीके के अनुसार धूप अगरबती व् दीपक अर्पित करें! जो गोमती चक्र आपने पीपल वृक्ष के नीचे दबाये थे उन्हें निकल लें और अपनी जेब में रखें जब तक कि आपका स्वास्थ्य ठीक न हो या कार्य सिद्ध न हो ! कुछ ही समय में रोगी का स्वास्थ्य ठीक होने लगेगा या आपका विशेष कार्य सिद्ध होने लगेगा ! इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि आपका कार्य असंभव न हो !

Holi Ke Totke होली पर नवग्रह प्रकोप से मुक्ति

यदि आपको किसी भी ग्रह से किसी भी प्रकार का कष्ट है तो आप होलिका दहन की रात्रि में ये उपाय करें जिससे नवग्रह शांत होंगे व् आप पर उनकी विशेष अनुकम्पा बनी रहेगी !

नवग्रह अनुकम्पा प्राप्त करने की लिए आप बिना सिले हुए पीले वस्त्र धारण कर अपने निवास स्थान के किसी शुद्ध व् शान्त स्थल पर गंगाजल छिड़कें! इसके पश्चात् उस स्थल को गाय के गोबर से लीपें व् उस पर एक लकड़ी की चौंकी या पटरा रखें ! अब उस चौंकी पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं और उसपर सात प्रकार के अनाज से ढ़ेरी बनाकर ढ़ेरी पर अभिमंत्रित नवग्रह यंत्र को रखें ! लाल कपडे के आसन पर बैठकर नवग्रह यंत्र को केसर से तिलक कर शुद्ध घी का दीपक और धूप अगरबती अर्पित करें और आशीर्वाद देने का निवेदन करें ! इसके पश्चात नीचे लिखे स्तोत्र का 11 बार पाठ करें !

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महद्युतिम

तमोरि सर्वपापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं (सूर्यदेव) II 1 II

 

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवं

नमामि शशिनं सोंमं शंभोर्मुकुटभूषणं (चंद्रदेव) II 2 II

 

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं

कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं (मंगलदेव) II 3 II

 

प्रियंगुकलिका शामं रूपेणा प्रतिमं बुधं

सौम्यं सौम्य गुणपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहं (बुद्धदेव) II 4 II

 

देवानांच ऋषिणांच गुरुंकांचन सन्निभं

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिं (बृहस्पतिदेव) II 5 II

 

हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूं

सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं (शुक्रदेव) II 6II

 

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्वरं (शनिदेव) II 7 II

 

अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनं

सिंहिका गर्भसंभूतं तं राहूं प्रणमाम्यहं (राहूदेव) II 8 II

 

पलाशपुष्प संकाशं तारका ग्रह मस्तकं

रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहं (केतुदेव) II 9 II

 

इति व्यासमुखोदगीतं य पठेत सुसमाहितं

दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशांतिर्भविष्यति II 10 II

 

नरनारीनृपाणां च भवेत् दु:स्वप्ननाशनं

ऐश्वर्यंमतुलं तेषांमारोग्यं पुष्टिवर्धनं II 11 II

 

ग्रहनक्षत्रजा पीडास्तस्कराग्निसमुद्भवा

ता: सर्वा: प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रुते न संशय: II 12 II

 

पाठ के बाद नवग्रह यंत्र को प्रणाम करके उठ जाएँ ! अगले दिन सुबह नवग्रह यंत्र को अपने पूजाघर में स्थापित करें ! अब जब भी आप घर से निकलें , तो नवग्रह यंत्र के दर्शन करके ही जाएँ ! आपका कार्य अवश्य ही सिद्ध होगा व् नवग्रहों की आप पर कृपा सदा ही बनी रहेगी !